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निगोहा क्षेत्र में मच्छरों के आतंक से ग्रामीण परेशान , ग्रामीणों में डेंगू जैसी बिमारी की दहसत

सिर्फ कागजों पर हो रहा दवा का छिड़काव

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मच्छरों के आतंक से ग्रामीण परेशान , ग्रामीणों में डेंगू जैसी बिमारी की दहसत

सिर्फ कागजों पर हो रहा दवा का छिड़काव

निगोहा । लखनऊ के विकास खंड मोहनलालगंज में इन दिनों मौसम बदलने के साथ ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। दिन हो या रात घरों में मच्छरों का आतंक रहता है। रात के समय तो लोगों को अधिक दिक्कत होती है। खासकर छोटे बच्चे अधिक परेशान होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक मच्छर मारने वाली दवा का छिड़काव नहीं किया गया है। आंकड़ों की मानें मच्छर मारने के लिए हर माह एक परिवार सैकड़ों रुपया तक खर्च करता है। गुड नाइट और मच्छर मारने वाले क्वाइल स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक हैं। इससे लोग श्वास सहित कई रोगों के शिकार हो रहे हैं। मच्छरों से होनेवाली बीमारियों से प्रत्येक वर्ष लोगों की मौत होती है। मलेरिया, डेंगू सहित अन्य बीमारियों से बचने के लिए लोग मॉस्किटो किलर का उपयोग करते हैं। हर महीने लाखों रुपये का मॉस्किटों किलर का इस्तेमाल होता है, लेकिन मॉस्किटो किलर फायदा से अधिक नुकसान पहुंचा रहा हैं। हर माह सैकड़ों रुपये खर्च होते हैं। यदि स्वास्थ्य विभाग नाली नालो में व पानी एकत्रित हुए जगह पर दवा का छिड़काव कर दे तो ग्रामीण क्षेत्रों से मच्छरों का सफाया हो जाएगा।ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्रों में साफ सफाई नियमित रूप से नहीं हो रही है। नालियों की सफाई नहीं हो रही है। नाला का स्लैब खुले होने के कारण मच्छर पनप रहे हैं , दवा का छिड़काव सिर्फ कागजों पर ही हो रहा है ,जमीनी हकीकत कुछ और ही है। गंदगी व दवा का छिड़काव न होने के चलते क्षेत्र में डेंगू , मलेरिया होने का खतरा बढ़ गया है। शाम होते ही घरों में मच्छर प्रवेश कर जाते हैं। रात में मच्छर काटने के कारण लोगों का बुरा हाल है। स्वास्थ्य विभाग मच्छरों के आगे नतमस्तक हो गया है। खून चूस रहे मच्छरों को मारने के लिए बजट के नाम पर विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। मच्छरों को मारने की जिम्मेवारी स्वास्थ्य विभाग की है लेकिन वह पता नहीं किस विभाग के भरोसे बैठे है। स्वास्थ्य विभाग सिर्फ कागज पर फॉगिंग मशीन व ब्लीचिंग पाउडर से मच्छरों को मार रहा है। ऐसे में ग्रामीणों का खून रात-दिन मच्छर चूस रहे हैं। इस कारण उन्हें बीमारी मुफ्त में मिल रही है। क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप दिन दूनी रात चौगुनी की दर से बढ़ रहा है। स्थिति ऐसी की कहीं पर भी कोई भी मच्छरों के कारण सकुन से बैठ नहीं सकता है। शाम और रात की बात तो छोड़िए दिन में भी बैठना मुश्किल होता है। चौबीसों घंटे मच्छर लोगों का खून चुसते हैं। सुबह शाम मच्छरों का झुंड लोगों पर टूट पड़ता है। लेकिन मच्छरों को रोक थाम करने वाले स्वास्थ्य विभाग को नजर नहीं आती। जबकि विभाग मच्छरों के उन्मूलन करने की बात कहता है। गांवों की बात करें तो सभी निगोहा इलाके के मीरख नगर , कांटा करौंदी , करनपुर ,भगवानपुर , शेरपुर, लवल ,नंदौली, बिरसिंहपुर, राती, मस्तीपुर, रत्नापुर ,रामपुर गढ़ी जमुनी, नारायण खेड़ा , नंदौली आदि दर्जनों गांव में मच्छरों का प्रकोप जारी है। पर मच्छरों के आगे स्वास्थ्य विभाग हार चुका है। स्थिति ऐसी बन गई है कि मच्छरों के प्रकोप से घर-घर लोग बीमार हो रहे हैं। कोई मलेरिया तो कोई डेंगू तो कोई अन्य मच्छर जनित बीमारियों कि चपेट में है। सैकड़ों लोग रोज किसी न किसी पैथोलोजी में मलेरिया व डेंगू कि जांच कराते नजर आते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग अभी भी इसके बड़े रूप का इंतजार कर रहा है। अगर जल्द ही स्वास्थ्य विभाग नहीं जागा तो समस्या और बढ जाएगी। और कई लोग डेंगू जैसी बिमारी की चपेट में आ सकते हैं, जिसके चलते ग्रामीणों में रोष व्याप्त है ।गांवों में फागिंग मशीन से छिड़काव नहीं होता है। लोगों की मानें तो मच्छरों के बचाव से निजी इंतजाम नहीं किए जाए तो घंटे दो घंटे भी लोग सो तक नहीं सकते। कहने को तो स्वास्थ्य विभाग के पास मच्छरों की रोकथाम के लिए बहुत सारे उपाय हैं । लेकिन, इसका उपयोग धरातल पर शून्य ही नजर आता है। मच्छरों से मुक्ति दिलाने का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग पर है, लेकिन वह अपनी इस जिम्मेवारी को भुला दिया है। उक्त प्रकरण की जानकारी के लिए जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहनलालगंज के चिकित्सा अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि एक एक बार निगोहा इलाके के सभी गांव में दवा का छिड़काव किया गया है वहीं जब मीरक नगर ग्राम सभा में दवा छिड़काव को लेकर बात की गई तो अधीक्षक जी ने बताया कि शायद वहां पर कोई एनम की तैनाती नहीं है इसलिए छिड़काव न हुआ होगा l ग्रामीणों का कहना है कि अगर एक आध बार छिड़काव एक आध बार नालियों में हो भी गया तो यह ऊंट के मुंह में जीरा वाली बात होगी lमौसम में परिवर्तन के साथ ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। मच्छरों पर अंकुश नहीं लगाने से वह काफी खतरनाक हो जाता हैं। मच्छर जनित बीमारियां पैर पसारने लगती है। लोग मलेरिया, डेंगू जैसे संक्रामक रोगों का शिकार हो रहे हैं।

निगोहा से सर्वेश शुक्ला की रिपोर्ट

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