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रायबरेली – आखिर क्या है जमीनी हकीकत , कागजों पर चल रहा महाविद्यालय

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आखिर क्या है ?  जमीनी हकीकत , कागजों पर चल रहा महाविद्यालय

बछरावां /  रायबरेली। स्थानीय विकास खंड के अंदर राजामऊ ग्राम सभा के अंतर्गत एक महाविद्यालय कागजों पर संचालित किया जा रहा है। इस संस्कृत महाविद्यालय के मैनेजर वहीं के रहने वाले तथा मौजूदा समय में बछरावां में स्थित जनक दुलारी ठाकुरद्वारा के पुजारी दुर्गा प्रसाद त्रिपाठी मैनेजर हैं राजा मऊ के ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने इस महाविद्यालय के अंदर कभी छात्र-छात्राओं का आगमन नहीं देखा पूर्व प्रधान राकेश तिवारी के अनुसार उनके ग्राम सभा मैं 4 विद्यालय जिनमें प्राथमिक विद्यालय तथा जूनियर हाई स्कूल है महाविद्यालय के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है लगभग आधा विश्वा जमीन जो गांव के बाहर खेतों में स्थित है उस पर एक हाल और एक बरामदा बना हुआ हैl वहां वह अक्सर जानवरों को बैठे हुए देखते हैं यह भवन पूर्व सांसद कैप्टन सतीश शर्मा की निधि से बनवाया गया था सुनते हैं वही महाविद्यालय की बिल्डिंग है रजवाड़ों के द्वारा कस्बे के अंदर स्थापित एक राम जानकी मंदिर मे बोर्ड लगा हुआ है जो संस्कृत महाविद्यालय के नाम को प्रदर्शित करता है दो-चार कुर्सियां पड़ी हुई है अशोक शुक्ला नामक एक व्यक्ति आए दिन राजामऊ आकर इधर-उधर होटलों पर बैठकर राजनीतिक वार्ता में मशगूल रहता है और चला जाता है ।सुनने में आया है वह व्यक्ति महाविद्यालय में अध्यापक है इसी गांव के निवासी विनोद कुमार ने बताया कि उनकी जानकारी में ही नहीं है कि राजा मऊ के अंदर कोई संस्कृत महाविद्यालय भी है मोहम्मद नसीम के अनुसार लगभग 40 /45 वर्ष पूर्व उन्हें सुनने को मिला था राजा मऊ में कोई संस्कृत विद्यालय स्थापित किया गया है शुरुआती दौर में छात्र-छात्राएं भी दिखाई पड़ते थे मगर बीते 10/ 15 वर्षों से कोई भी छात्र या छात्रा अथवा शिक्षण कार्य उन्होंने नहीं देखा अगर कहीं कागजों पर यह महाविद्यालय चलाया जा रहा है तो उन्हें इसकी जानकारी नहीं है इसी गांव के निवासी वासुदेव ने बताया कभी-कभी जब वह मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं तो गेट पर ही एक छोटा सा बोर्ड लगा हुआ है लेकिन विद्यालय कहां है आज तक ढूंढ ही नहीं पाए इसी गांव के वरिष्ठ नागरिक बच्चा तिवारी ने बताया इस महाविद्यालय में गांव के ही निवासी दुर्गा प्रसाद तिवारी मैनेजर बने थे जब से यह मैनेजर बने पूरे विद्यालय को खा डाला आज हालात यह है कि कागजों पर भले ही छात्र-छात्राएं अंकित हो मगर धरातल पर कोई कार्य नहीं है ना कहीं अध्यापक पढ़ाते नजर आते हैं ना कहीं छात्र अध्ययन करते नजर आते हैं जबकि यह भी सुनने को मिला है कि सरकार लाखों रुपए प्रतिमाह वेतन व अन्य अनुदान के नाम पर दे रही है इसी गांव के निवासी विनोद कुमार राम मिलन मोहम्मद आसिफ के अनुसार इनकी जानकारी में ही नहीं है कि कहीं महाविद्यालय संचालित भी किया जा रहा है उन लोगों का कहना है कि अगर कहीं विद्यालय वजूद में हो तो भी सरकारी तंत्र को चाहिए कि तुरंत उसमें रिसीवर बैठाकर विद्यालय की व्यवस्था अपने हाथ ले और छात्र-छात्राओं के दाखिले किए जाएं ताकि विद्यालय धरातल पर उतर सके और यदि ऐसा नहीं संभव है तो सरकार के लाखों रुपए बचाते हुए उक्त विद्यालय को समाप्त ही कर दिया जाए क्योंकि केवल कागजों पर समाप्त होना बाकी है बाकी वास्तविकता यह है कि विद्यालय धरातल पर समाप्त ही हो चुका है महाविद्यालय को लेकर मुबारकपुर सांपों राजा मऊ तथा मान्हारकटरा के सैकड़ों लोगों ने बताया संस्कृत महाविद्यालय का कोई वजूद नहीं है इस संदर्भ में जब मैनेजर दुर्गा प्रसाद त्रिपाठी से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया महाविद्यालय कि इन स्थितियों को देखते हुए क्या संपूर्णानंद महाविद्यालय के जिम्मेदार पदाधिकारी व शिक्षा विभाग से संबंधित अधिकारी तथा जिले के हुक्मरान इस पर अंकुश लगाने का प्रयास करेंगे वैसे राजा मऊ की जनता विद्यालय चलाने वाले भ्रष्ट लोगों के विरुद्ध कार्यवाही हेतु अधिकारियों की ओर बड़ी आशा भरी नजर से देख रहा है l

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